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#✍ माझ्या लेखनीतून ✍
✍ माझ्या लेखनीतून ✍ - तो शिकायतें बहुत हैं , तुझसे ऐ जढ़ेगी , पर चुप इसलिए हूँ , कि जो दिया तूने , वो भी बहुतों को नसीब नहीं होता । ' - बिखरे जज्ब - ShareChat