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#ધર્મ અને અધ્યાત્મ
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - आध्यात्म की ओर. (Towards Spirituality) वर्तमान युग को कलयुग या रावण राज्य कहा जाता है নগ্ী रखते हैं। इस् युग को फिर से राम राज्य लाने की चाह रावण राज्य क्यों कहते हैं ? रावण कोई असुर नहीं, ब्राम्हण था अर्थात् ऊंच कुल का था, महाविद्वान था। अपनी बुद्धि की शक्ति से प्रकृति के सभी देवताओं को और नौ ग्रहों को अपना दास बनाकर रखा था। उसके पास दिव्य अस्त्र-शस्त्र थे। धनवान उसकी पूरी लंका सोने की थी। महान शिव भक्त भी था। 91, बुद्धि और भक्ति - इन चारों ही बातों में संपग्न था अर्थ , बल, सर्वनाश हुआ क्योंकि उसके जीवन में दो फिर भी उसका कमजोरियां थीं - २. अहंकार की अति और २. चरित्रहीनता| मनुष्य जैसा बुद्धिवान और शक्तिशाली और कोई नहीं। आज से ऊड़ सकता है , समुद्र मार्ग से यात्रा कर सकता वायु मार्ग d है। विज्ञान की शक्ति से इंद्र देव को नल में , वायु देव को electric switch में और अग्नि देव को cyllinder में कैद कर रखा है जो एक बटन दबाते ही सेवा में हाज़िर हो जाते हैं। मिसाइल (त्रह्मास्त्र ) भी बना लिया है भी है , गली- गली 5 बुद्धि और भक्ति इन में धर्म स्थल बने हुए हैं। अर्थ , बल, चारों ही उपब्धियों से संपग्न है इतना सब होने के बाद भी संसार अपने ही सर्वनाश की दिशा में अग्रसर है क्योंकि आज २. अहंकार और २. चरित्रहीनता या नैतिक पतन भी चरम पर है। हैं कि सृष्टि हिंसा और नकारात्मकता चरम पर है कह सकते अपने   परिवर्तन की ओर अग्रसर है। I6 August 2023 Brahmakumaris आध्यात्म की ओर. (Towards Spirituality) वर्तमान युग को कलयुग या रावण राज्य कहा जाता है নগ্ী रखते हैं। इस् युग को फिर से राम राज्य लाने की चाह रावण राज्य क्यों कहते हैं ? रावण कोई असुर नहीं, ब्राम्हण था अर्थात् ऊंच कुल का था, महाविद्वान था। अपनी बुद्धि की शक्ति से प्रकृति के सभी देवताओं को और नौ ग्रहों को अपना दास बनाकर रखा था। उसके पास दिव्य अस्त्र-शस्त्र थे। धनवान उसकी पूरी लंका सोने की थी। महान शिव भक्त भी था। 91, बुद्धि और भक्ति - इन चारों ही बातों में संपग्न था अर्थ , बल, सर्वनाश हुआ क्योंकि उसके जीवन में दो फिर भी उसका कमजोरियां थीं - २. अहंकार की अति और २. चरित्रहीनता| मनुष्य जैसा बुद्धिवान और शक्तिशाली और कोई नहीं। आज से ऊड़ सकता है , समुद्र मार्ग से यात्रा कर सकता वायु मार्ग d है। विज्ञान की शक्ति से इंद्र देव को नल में , वायु देव को electric switch में और अग्नि देव को cyllinder में कैद कर रखा है जो एक बटन दबाते ही सेवा में हाज़िर हो जाते हैं। मिसाइल (त्रह्मास्त्र ) भी बना लिया है भी है , गली- गली 5 बुद्धि और भक्ति इन में धर्म स्थल बने हुए हैं। अर्थ , बल, चारों ही उपब्धियों से संपग्न है इतना सब होने के बाद भी संसार अपने ही सर्वनाश की दिशा में अग्रसर है क्योंकि आज २. अहंकार और २. चरित्रहीनता या नैतिक पतन भी चरम पर है। हैं कि सृष्टि हिंसा और नकारात्मकता चरम पर है कह सकते अपने   परिवर्तन की ओर अग्रसर है। I6 August 2023 Brahmakumaris - ShareChat