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#☝अनमोल ज्ञान
☝अनमोल ज्ञान - मज्जन फल पेखिअ ततकाला। काक होहिं पिक बक मराला।। सुनि आदरहिं जो होहिं सयाने। तिन्ह के हृदयँ न कवनहुँ पाने।l  राम राम मैनी तुलसीदास जी का मानना था कि इंसान जैसी संगति में रहता है, वैसा ही बन जाता है। यहाँ तक कि निर्जीव वस्तुएँ भी संगति से अपना गुण बदल लेती हैं।सत्संगति का प्रभाव तत्काल दिखता है। कौआ कोयल बन जाता है और बगुला बुद्धिमान लोग इसे और अपनाते हैं, उनका हंस। जो सुनते जीवन संवर जाता है। जय सियाराम मज्जन फल पेखिअ ततकाला। काक होहिं पिक बक मराला।। सुनि आदरहिं जो होहिं सयाने। तिन्ह के हृदयँ न कवनहुँ पाने।l  राम राम मैनी तुलसीदास जी का मानना था कि इंसान जैसी संगति में रहता है, वैसा ही बन जाता है। यहाँ तक कि निर्जीव वस्तुएँ भी संगति से अपना गुण बदल लेती हैं।सत्संगति का प्रभाव तत्काल दिखता है। कौआ कोयल बन जाता है और बगुला बुद्धिमान लोग इसे और अपनाते हैं, उनका हंस। जो सुनते जीवन संवर जाता है। जय सियाराम - ShareChat