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#⚡शेयरचैट स्पेशल फीचर्स
⚡शेयरचैट स्पेशल फीचर्स - % देवता महर्षि दघीचि के पास गए। उन्होंने हाथ ==+` भगवान विष्णु को प्रणाम कर इंद्र सहित  सभो पर अघिकार कर वृत्रासुर ने हमें युद्ध स्वर्ग िया  हराकर Teldd भयंकर दानव महामुनि से प्रार्थना को- గ్ై =TuేT: कीजिए। हम सब आपकी शरण में आए है।  हमारी सहायता है; और हमें हर तरह कष्ट पहुँचाया है। आप हूँ। कृप्या बताइए मैं कर सकता देवताओं की किस प्रकार सहायता महर्षि दघीचि ने कहा-" मैं आप  अवश्य आपकी सहायता करुगा।  बने वज्र से ही वृत्रासुर मारा जा सकेगा। 7 एसा चाहिए। उनस इंद्र ने कहा " हे ऋषि! हमें आपकी " अस्थयिया १ होते हुए बोले - " एक॰न- एक दिन मृत्यु के भगवान का आदेश सुन महर्षि प्रसन्न " श्रीहरि ने कहा है।  भगवान बाद यह शरोर किसी के काम आ सके तो बहुत अच्छा है। '  शरीर त्याग दिया। महर्षि के अंतिम संस्कार के उपरांत उनको  महर्षि दधीचि ने योग द्वारा अपना " वज्र से निकलते दिव्य- इतना कह १इस वज्र को ले इंद्र जब वृत्रासुर के सामने पहुँचे तो वृत्रासुर  अस्थियों से वज्र बनाया गया।  इंद्र ने देर न करके वज्र के एक ही प्रहार से वृत्रासुर को यमलोक पहुँचा दिया। - देख भयभीत हो गया।  गूँज रहा था। वृत्रासुर के मारे  प्रकाश का जयघोष महर्षि दधीचि की जय का विष्णु  देवलोक में चारों ओर भगवान  का जयः और स्वर्ग पर पुनः अपने अधिकार से सभी देवता प्रसन्न थे। जान शिक्षा  शरीर का भी त्याग कर देते है। परोपकारी परहित के लिए अपने अध्यास का चिहन लगाइए सही विक़ल्प पर यह कहानी किस काल की है? महाभारत काल (111) प्राचीन काल  काल पुरातन महर्षि दधीचि के पिता का क्या नाम था? (ii) 3uಷf' अथवा अर्थवा दधीचि किसके परम भक्त थे? शिव के 0 பக ப5 वृत्रासुर किसका पुत्र था? त्वष्टा का शुक़्राचार्य 7 रावण का विष्णु ने इंद्र व सभी देवताओं को किसके पास भेजा?  भगवान दधीचि के पास ब्रह्मा के पास शिव के पास (iii) नैतिक रिक्षा सव F75 5   % देवता महर्षि दघीचि के पास गए। उन्होंने हाथ ==+` भगवान विष्णु को प्रणाम कर इंद्र सहित  सभो पर अघिकार कर वृत्रासुर ने हमें युद्ध स्वर्ग िया  हराकर Teldd भयंकर दानव महामुनि से प्रार्थना को- గ్ై =TuేT: कीजिए। हम सब आपकी शरण में आए है।  हमारी सहायता है; और हमें हर तरह कष्ट पहुँचाया है। आप हूँ। कृप्या बताइए मैं कर सकता देवताओं की किस प्रकार सहायता महर्षि दघीचि ने कहा-" मैं आप  अवश्य आपकी सहायता करुगा।  बने वज्र से ही वृत्रासुर मारा जा सकेगा। 7 एसा चाहिए। उनस इंद्र ने कहा " हे ऋषि! हमें आपकी " अस्थयिया १ होते हुए बोले - " एक॰न- एक दिन मृत्यु के भगवान का आदेश सुन महर्षि प्रसन्न " श्रीहरि ने कहा है।  भगवान बाद यह शरोर किसी के काम आ सके तो बहुत अच्छा है। '  शरीर त्याग दिया। महर्षि के अंतिम संस्कार के उपरांत उनको  महर्षि दधीचि ने योग द्वारा अपना " वज्र से निकलते दिव्य- इतना कह १इस वज्र को ले इंद्र जब वृत्रासुर के सामने पहुँचे तो वृत्रासुर  अस्थियों से वज्र बनाया गया।  इंद्र ने देर न करके वज्र के एक ही प्रहार से वृत्रासुर को यमलोक पहुँचा दिया। - देख भयभीत हो गया।  गूँज रहा था। वृत्रासुर के मारे  प्रकाश का जयघोष महर्षि दधीचि की जय का विष्णु  देवलोक में चारों ओर भगवान  का जयः और स्वर्ग पर पुनः अपने अधिकार से सभी देवता प्रसन्न थे। जान शिक्षा  शरीर का भी त्याग कर देते है। परोपकारी परहित के लिए अपने अध्यास का चिहन लगाइए सही विक़ल्प पर यह कहानी किस काल की है? महाभारत काल (111) प्राचीन काल  काल पुरातन महर्षि दधीचि के पिता का क्या नाम था? (ii) 3uಷf' अथवा अर्थवा दधीचि किसके परम भक्त थे? शिव के 0 பக ப5 वृत्रासुर किसका पुत्र था? त्वष्टा का शुक़्राचार्य 7 रावण का विष्णु ने इंद्र व सभी देवताओं को किसके पास भेजा?  भगवान दधीचि के पास ब्रह्मा के पास शिव के पास (iii) नैतिक रिक्षा सव F75 5 - ShareChat