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sundar seekh - ek kalpnik kahani... #story #kahani #कहानी #📚कविता-कहानी संग्रह
story - १६९. सुन्दर सीख घर से ऑफिस जाते समय एक दृश्य देखा। एक महिला अपनी बच्ची को लेकर ड्राइव कर रही थी।जो उस महिला ने किया उसे देख कर ऐसा लगा कि ज़रूरउस नन्ही बच्ची के मन में कुछ ऐसे ही सवाल उमड़े होंगे।  हर रोज़ की तरह राधिका अपनी 4 साल की बेटी प्रिया को स्कूल से लेकर घर आ रही थ। यह उसका  नियम था वह घर से निकलते समय गाय की रोटी लेती ओर गाय को रोटी देकर प्रिया को लेने जाती। लेकिन उस दिन संयोगवश वह रोटी देना भूल गयी तो उसने सोचा लोटते समय गाय को रोटी दे देगी। आगे का एक झुंड आता हुआ दिखाई दिया। सेउसे गाय प्रिया पीछे ही बेठी थी। राधिका ने गाडी थोड़ी धीमे की ओर गाय के सामने रोटी को फेंक दियाः स्पीड देकर आगे बढ गई। पीछे बेठी प्रियाःने मम्गी को कस के पकड़ लिया ओर बोली मम्मा आप तो कहते हें कि काऊ मम्मा होती  हे? हाँ बेटा गाय मा होती हैः मम्मा होती है। प्रिया ने फिर पूछा आप तो हे गाय गॉड हे। हाँ कहती बेटा गाय में ही सारे भगवान होते हें। काउ गॉड हे। इसके बाद प्रिया नेजो कहा वह सुनकर राधिका केःपौव केनीचे की ज़मीन खिसक गयी। प्रिया बोली फिर आपने भगवान के सामने रोटी क्यों फेंँकी? हमें नीचे उतर कर भगवान को रोटी खिलानी चाहिए न।२२ अब वह इन शब्दों को सुनकर सोचने लग गई कि॰ बच्चे जो देखते हें वही सीखते हे। जाने अनज़ाने में हम बैठते हें कि हमें ख़ुद को पता नहीं होता ऐसा कर कुछ है कि उसका बच्चों के मन मस्तिष्क पर क्या प्रभाव पडेगा। वह प्रिया को ऐसे भी नहीं बोल सकती थी कि हमें स्कूल जाने के लिए देरी हो रही थी॰ इसलिए मैने ऐसा  किया क्योंकि वह प्रिया को लेकर लोट रही थी। मौके की नज़ाकत को समझते हुए उसने प्रिया को सॉरी बोला आर कहा आगे सेमै इस बात काःथ्यान रखूँगी बेटा। नन्ही गुड़िया ख़ुश हो गई। पीछे बैठी बैठी  कविता गुनगुनाने लगी. अपनी ४ सुमित मानधना 'गौरव মুনে; যুতযান १६९. सुन्दर सीख घर से ऑफिस जाते समय एक दृश्य देखा। एक महिला अपनी बच्ची को लेकर ड्राइव कर रही थी।जो उस महिला ने किया उसे देख कर ऐसा लगा कि ज़रूरउस नन्ही बच्ची के मन में कुछ ऐसे ही सवाल उमड़े होंगे।  हर रोज़ की तरह राधिका अपनी 4 साल की बेटी प्रिया को स्कूल से लेकर घर आ रही थ। यह उसका  नियम था वह घर से निकलते समय गाय की रोटी लेती ओर गाय को रोटी देकर प्रिया को लेने जाती। लेकिन उस दिन संयोगवश वह रोटी देना भूल गयी तो उसने सोचा लोटते समय गाय को रोटी दे देगी। आगे का एक झुंड आता हुआ दिखाई दिया। सेउसे गाय प्रिया पीछे ही बेठी थी। राधिका ने गाडी थोड़ी धीमे की ओर गाय के सामने रोटी को फेंक दियाः स्पीड देकर आगे बढ गई। पीछे बेठी प्रियाःने मम्गी को कस के पकड़ लिया ओर बोली मम्मा आप तो कहते हें कि काऊ मम्मा होती  हे? हाँ बेटा गाय मा होती हैः मम्मा होती है। प्रिया ने फिर पूछा आप तो हे गाय गॉड हे। हाँ कहती बेटा गाय में ही सारे भगवान होते हें। काउ गॉड हे। इसके बाद प्रिया नेजो कहा वह सुनकर राधिका केःपौव केनीचे की ज़मीन खिसक गयी। प्रिया बोली फिर आपने भगवान के सामने रोटी क्यों फेंँकी? हमें नीचे उतर कर भगवान को रोटी खिलानी चाहिए न।२२ अब वह इन शब्दों को सुनकर सोचने लग गई कि॰ बच्चे जो देखते हें वही सीखते हे। जाने अनज़ाने में हम बैठते हें कि हमें ख़ुद को पता नहीं होता ऐसा कर कुछ है कि उसका बच्चों के मन मस्तिष्क पर क्या प्रभाव पडेगा। वह प्रिया को ऐसे भी नहीं बोल सकती थी कि हमें स्कूल जाने के लिए देरी हो रही थी॰ इसलिए मैने ऐसा  किया क्योंकि वह प्रिया को लेकर लोट रही थी। मौके की नज़ाकत को समझते हुए उसने प्रिया को सॉरी बोला आर कहा आगे सेमै इस बात काःथ्यान रखूँगी बेटा। नन्ही गुड़िया ख़ुश हो गई। पीछे बैठी बैठी  कविता गुनगुनाने लगी. अपनी ४ सुमित मानधना 'गौरव মুনে; যুতযান - ShareChat