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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📓 हिंदी साहित्य #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #❤️ प्यार की कहानियां
✍️ साहित्य एवं शायरी - रोज़ रोज़ जलते हैं फिर भी खाक़ न हुए अजीब हैं कुछ ख़्वाब भी॰ बुझ कर भी राख़ न हुए.. रोज़ रोज़ जलते हैं फिर भी खाक़ न हुए अजीब हैं कुछ ख़्वाब भी॰ बुझ कर भी राख़ न हुए.. - ShareChat