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#📚कविता-कहानी संग्रह #✍️ साहित्य एवं शायरी #✨उर्दू शायरी #📖 कविता और कोट्स✒️
📚कविता-कहानी संग्रह - ख़ुद को इतना जो हवा दार समझ रक्खा है क्या हमें रेत की दीवार समझ रक्खा है हम ने किरदार को कपड़ों की तरह पहना है कपड़ों ही को किरदार समझ रक्खा है 3+ ख़ुद को इतना जो हवा दार समझ रक्खा है क्या हमें रेत की दीवार समझ रक्खा है हम ने किरदार को कपड़ों की तरह पहना है कपड़ों ही को किरदार समझ रक्खा है 3+ - ShareChat