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#🖋शेरो-शायरी #📝कविता / शायरी/ चारोळी
🖋शेरो-शायरी - ज़िन्दगी जिनके पास अपने हैं वो अपनों से झगड़ते हैं. ೦೦ವ जिनका कोई नहीं अपना, वो अपनों को तरसते हैं॰॰ | कल न हम होेंगे न गिला होगा| सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिललिसा होगा | जो लम्हे हैं चलो हंसकर बिता लें। जाने कल जिँदगी का क्या फैसला होगा | ज़िन्दगी जिनके पास अपने हैं वो अपनों से झगड़ते हैं. ೦೦ವ जिनका कोई नहीं अपना, वो अपनों को तरसते हैं॰॰ | कल न हम होेंगे न गिला होगा| सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिललिसा होगा | जो लम्हे हैं चलो हंसकर बिता लें। जाने कल जिँदगी का क्या फैसला होगा | - ShareChat