हँसते हुए चेहरे ही जब बन जाए मजबूरी,
तो आँसुओं का बहना भी अपराध होगा क्या।
रिश्ते निभाने में हो बस एक को झुकना ,
उस रिश्ते में रहना भी आसान होगा क्या।
लहजे बदलने पड़ें अगर इज़्ज़त पाने को,
तो अपने होने पे कोई गुमान होगा क्या।
औरत की हर ख़्वाहिश पर हो पड़ा पहरा,
तो उसके उड़ने को कोई आसमान होगा क्या।
मैं पूछती हूँ इस दौर, इस बेरहम रिवाज़ से —
ख़ामोश रहना ही अब समाधान होगा क्या।
✍️ #💓 मोहब्बत दिल से

