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#☺️प्रेरक विचार #🎭Whatsapp status #📝कविता / शायरी/ चारोळी #🤘टाईमपास😝
☺️प्रेरक विचार - जड़ें खूनी गाँव की सरहद पर पुराना बरगद का पेड़ है, जटाएँ इतनी घनी की रोशनी का आना भी कम है। मानो कई काले राज छुपा रखे हों साये में अपने , वो पेड़ नहीं यादों का एक ज़िंदा कब्रिस्तान है। उन काले राजों में दबी है वही खूनी पुरानी चीखें, जड़ों के जाल से लिपटी हैं कितनी पुश्तैनी सीखें। कहते हैं जो वहाँ गया वो खुद एक राज बन गया, हँसता खेलता इंसान बस एक जिंदा लाश बन गया। वो जटाएँ नहीं , वो फाँसी के फंदे लगते हैं, जो मासूम : गर्दनों के नाप परही तंग होते हैं। हवा जब सरसराती वहाँ, तो रस्सियाँ झूलती हैं, जैसे पुरानी रूहें, किसी अपनों को ढूँढती हैं। वहाँ परिंदे भी बैठने से कतराते हैं, सुना है, सन्नाटे भी वहाँ शोर मचाते हैं। वो जो पुश्तैनी सीख थी, वो अब एक श्राप है, उस बरगद के सीने में दफन , गाँव का ही कोई पाप है। रात के चौथे पहर, वहाँ अजीब नज़ारे होते हैं, जो लौट कर नहीं आए॰ वो शायद वहीं रोते हैं। सरहद का वो पेड़, अब गाँव को डराता है, वो यादों का कब्रिस्तान , अब सबको बुलाता है। Amulia' spoem| பயவ@ abosm जड़ें खूनी गाँव की सरहद पर पुराना बरगद का पेड़ है, जटाएँ इतनी घनी की रोशनी का आना भी कम है। मानो कई काले राज छुपा रखे हों साये में अपने , वो पेड़ नहीं यादों का एक ज़िंदा कब्रिस्तान है। उन काले राजों में दबी है वही खूनी पुरानी चीखें, जड़ों के जाल से लिपटी हैं कितनी पुश्तैनी सीखें। कहते हैं जो वहाँ गया वो खुद एक राज बन गया, हँसता खेलता इंसान बस एक जिंदा लाश बन गया। वो जटाएँ नहीं , वो फाँसी के फंदे लगते हैं, जो मासूम : गर्दनों के नाप परही तंग होते हैं। हवा जब सरसराती वहाँ, तो रस्सियाँ झूलती हैं, जैसे पुरानी रूहें, किसी अपनों को ढूँढती हैं। वहाँ परिंदे भी बैठने से कतराते हैं, सुना है, सन्नाटे भी वहाँ शोर मचाते हैं। वो जो पुश्तैनी सीख थी, वो अब एक श्राप है, उस बरगद के सीने में दफन , गाँव का ही कोई पाप है। रात के चौथे पहर, वहाँ अजीब नज़ारे होते हैं, जो लौट कर नहीं आए॰ वो शायद वहीं रोते हैं। सरहद का वो पेड़, अब गाँव को डराता है, वो यादों का कब्रिस्तान , अब सबको बुलाता है। Amulia' spoem| பயவ@ abosm - ShareChat