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Mahendra Narayan
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ज़ज्बात को किसी के तमाशा न समझिए पानी न हो तो सबको प्यासा न समझिए इंसान हो इंसान की कदर करो ' महज़' दिल की लगी हर बात ज़रा सा न समिझए
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