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होलाष्टक फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से प्रारंभ होता है और होलिका दहन तक चलता है। इन आठ दिनों को अशुभ माना जाता है, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभकार्यों को इस दौरान निषेध बताया गया है। इन दिनों में भक्त प्रह्लाद पर अत्याचार किए गए थे, जिससे वातावरण में नकारात्मक शक्तियाँ सक्रिय हो जाती हैं। होलाष्टक की समाप्ति के बाद होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।🙏🏻 #होलाष्टक प्रारंभ #🌞 Good Morning🌞 #🙏राम राम जी #💐फूलों वाली शुभकामनाएं🌹 #❤️शुभकामना सन्देश
होलाष्टक प्रारंभ - ಶ چ होलाष्टक (आरम्भ' प्रत्येक वर्ष फाल्गुन शुक्लपक्ष अष्टमी के दिन से होलाष्टक शुरू होता है और इस पर्व का समापन होलिका दहन के दिन होता है। इस दिन संतान प्राप्ति के लिए लड्डू गोपाल की पूजा करते समय हवन करना श्रीकृष्ण ` के मंत्र कृं कृष्णाय नमः का जाप करें। मान्यता है कि चाहिए एवं होलाष्टक की शुरुआत वाले दिन ही शिव जी ने कामदेव को भस्म कर दिया था, इस काल में सभी ग्रह उग्र रूप में होते हैं। इसलिए होलाष्टक में जन्म और बाद किए जाने वाले कार्यों को छोड़कर अन्य कोई भी शुभ कार्य মূন্তু ক नहीं किये जाते हैं। होलाष्टक दिनों में पूजा-पाठ करने और भगवान का स्मरण और भजन करने को शुभ फलदायक माना गया है। ಶ چ होलाष्टक (आरम्भ' प्रत्येक वर्ष फाल्गुन शुक्लपक्ष अष्टमी के दिन से होलाष्टक शुरू होता है और इस पर्व का समापन होलिका दहन के दिन होता है। इस दिन संतान प्राप्ति के लिए लड्डू गोपाल की पूजा करते समय हवन करना श्रीकृष्ण ` के मंत्र कृं कृष्णाय नमः का जाप करें। मान्यता है कि चाहिए एवं होलाष्टक की शुरुआत वाले दिन ही शिव जी ने कामदेव को भस्म कर दिया था, इस काल में सभी ग्रह उग्र रूप में होते हैं। इसलिए होलाष्टक में जन्म और बाद किए जाने वाले कार्यों को छोड़कर अन्य कोई भी शुभ कार्य মূন্তু ক नहीं किये जाते हैं। होलाष्टक दिनों में पूजा-पाठ करने और भगवान का स्मरण और भजन करने को शुभ फलदायक माना गया है। - ShareChat