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#सोचने वाली बात #islam guide us in every field of life #Quran and We #points to ponder #*let us understand our religion
सोचने वाली बात - 23/2/26 ५वाँ रमज़ान १४४७ Qur'an (Surah Al-Insan 76:1-3) १. क्या इंसान पर एक ऐसा समय नहीं गुज़रा जब वह कोई ऐसी चीज़ भी नहीं था जिसका ज़िक्र किया जाता? निस्संदेह हमने इंसान को 2. मिले जुले पानी (नुत्फ़ा) की एक बूंद से पैदा किया, ताकि हम उसकी परीक्षा लें; और हमने उसे सुनने और देखने वाला बनाया। निस्संदेह हमने उसे रास्ता 3. दिखा दिया, चाहे वह शुक्रगुज़ार बने या नाशुक्रा| 11:39 pm 23/2/26 ५वाँ रमज़ान १४४७ Qur'an (Surah Al-Insan 76:1-3) १. क्या इंसान पर एक ऐसा समय नहीं गुज़रा जब वह कोई ऐसी चीज़ भी नहीं था जिसका ज़िक्र किया जाता? निस्संदेह हमने इंसान को 2. मिले जुले पानी (नुत्फ़ा) की एक बूंद से पैदा किया, ताकि हम उसकी परीक्षा लें; और हमने उसे सुनने और देखने वाला बनाया। निस्संदेह हमने उसे रास्ता 3. दिखा दिया, चाहे वह शुक्रगुज़ार बने या नाशुक्रा| 11:39 pm - ShareChat