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#डाॅ.बाबासाहेब अम्बेडकर
डाॅ.बाबासाहेब अम्बेडकर - " इंसान जीता हे, पैसे कमाता हे, खाना खाता हे और अंत मे मर जाता हे। जीता इसलीये है ताकी कमा सके | कमाता इसलिये है ताकी खा सके और खाता  इसलिये है ताकी जिंदा रह सके लेकीन फिरभी मर जाता | अगर सिर्फ मरने के डर से खाते हो तो अभी मर जाओ , मामला खत्म, मेहनत बच जायेगी | मरना तो सबको एकदिन है ही | समाज के लिये जीयो, जिंदगी का एक उद्देश्य बनाओ , गुलामी की जंजीर मे जकडे समाज को आजार कराओ , आपना और अपने बच्चों का भरण पोषण तो एक जानवर भी कर लेता है। मेरी नजर में इंस्तान वही है जो समाज की भी चिंता करे और समाज के लिये कार्य करे। " इंसान जीता हे, पैसे कमाता हे, खाना खाता हे और अंत मे मर जाता हे। जीता इसलीये है ताकी कमा सके | कमाता इसलिये है ताकी खा सके और खाता  इसलिये है ताकी जिंदा रह सके लेकीन फिरभी मर जाता | अगर सिर्फ मरने के डर से खाते हो तो अभी मर जाओ , मामला खत्म, मेहनत बच जायेगी | मरना तो सबको एकदिन है ही | समाज के लिये जीयो, जिंदगी का एक उद्देश्य बनाओ , गुलामी की जंजीर मे जकडे समाज को आजार कराओ , आपना और अपने बच्चों का भरण पोषण तो एक जानवर भी कर लेता है। मेरी नजर में इंस्तान वही है जो समाज की भी चिंता करे और समाज के लिये कार्य करे। - ShareChat