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#✍️ साहित्य एवं शायरी #अनकहा प्रेम
✍️ साहित्य एवं शायरी - अनकहा प्रेम ख़ामोशी में भी एक उजाला था, तुम्हारी जैसे शब्दों से परे कोई संवाद चला हो। मैंने तुम्हें देखा , पर महसूस ्यादा किया, यही है-जो कहा न जाए॰ परदिल में पनपता रहे। प्यार शायद अनकहा प्रेम ख़ामोशी में भी एक उजाला था, तुम्हारी जैसे शब्दों से परे कोई संवाद चला हो। मैंने तुम्हें देखा , पर महसूस ्यादा किया, यही है-जो कहा न जाए॰ परदिल में पनपता रहे। प्यार शायद - ShareChat