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#जीने की राह #viral #गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला #santrampaljimaharaj #gita quotes
जीने की राह - करोड़ शिव जी मर गए I अविधू  अविगत से चल आया कोई भेद मरहम न पाया ।। ना मेरा जन्म ना गर्भ बसेरा , बालक बन दिखलाया  काशी नगर जल कमल पे डेरा , वहां जुलाहे ने पाया ।। मातःपिता मेरे कछु नाही , ना मेरे घर दासी  जुलाहा का सूत आन कहाया , जगत करें मेरी हांसी ।। कोई जाने सतनाम उपासी লচু ন স২ , हाड चाम तारण तरण अभय पद दाता , में हूं कबीर अविनाशी अरबों तो ब्रह्मा गए , ऊंचास कोटि कन्हैया | सात करोड़ तेरे शंभू मर गय , मेरी एक नही पलैया  हम हे सत्यलोक के वासी दास कहाय प्रगट भय काशी थरि देह भवसागर आये , धर्मदास तोही नाम " सुनाये I করূলিত্ত में काशी चले आये हमारे तुम दर्शन पाये । जव तब हम नाम कबीर धराये काल देख तब रहे मुरझाये Il देह नहीं और दरसे देही , जग न चिन्हे पुरुष विदेही | नहीं बाप ना मात जाये , अविगत से हम चले आये ।। चारो जुग भवसागर आये , आदि नाम जग टेर सुनाये  नाम सुने शरणागत आवे , तीन्ही की हम बंध " छुड़ावे सतयुग सत्सुकृत कहाये , त्रेता नाम मुनींद्र धराये  द्वापर में करुणामय कहाये , कलयुग नाम कबीर रखाये ।। करोड़ शिव जी मर गए I अविधू  अविगत से चल आया कोई भेद मरहम न पाया ।। ना मेरा जन्म ना गर्भ बसेरा , बालक बन दिखलाया  काशी नगर जल कमल पे डेरा , वहां जुलाहे ने पाया ।। मातःपिता मेरे कछु नाही , ना मेरे घर दासी  जुलाहा का सूत आन कहाया , जगत करें मेरी हांसी ।। कोई जाने सतनाम उपासी লচু ন স২ , हाड चाम तारण तरण अभय पद दाता , में हूं कबीर अविनाशी अरबों तो ब्रह्मा गए , ऊंचास कोटि कन्हैया | सात करोड़ तेरे शंभू मर गय , मेरी एक नही पलैया  हम हे सत्यलोक के वासी दास कहाय प्रगट भय काशी थरि देह भवसागर आये , धर्मदास तोही नाम " सुनाये I করূলিত্ত में काशी चले आये हमारे तुम दर्शन पाये । जव तब हम नाम कबीर धराये काल देख तब रहे मुरझाये Il देह नहीं और दरसे देही , जग न चिन्हे पुरुष विदेही | नहीं बाप ना मात जाये , अविगत से हम चले आये ।। चारो जुग भवसागर आये , आदि नाम जग टेर सुनाये  नाम सुने शरणागत आवे , तीन्ही की हम बंध " छुड़ावे सतयुग सत्सुकृत कहाये , त्रेता नाम मुनींद्र धराये  द्वापर में करुणामय कहाये , कलयुग नाम कबीर रखाये ।। - ShareChat