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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - 10.47 vE .ulll Mahakal Kripa Follow 1  "ईश्वर का प्रसाद है दुःख जब भगवान सृष्टि की रचना कर रहे थे, See more ईश्वर का प्रसाद है दुःख की रचना कर रहे थे, तो उन्होंने जीव को कहा कि तुम्हें जब भगवान सृष्टि जाना पड़ेगा , मैं सृष्टि की रचना करने जा रहा हूँl ये सुन जीव मृत्युलोक  की आँखों में आँसू आ गए, वो बोला "प्रभु! कुछ तो ऐसा करों की मैं लौटकर आपके पास ही आऊँ। ' भगवान को दया आ गई। उन्होंने दो कार्य किये जीव के लिए। पहला संसार की हर चीज़ में अतृप्ति मिला दी, और जीव से कहा- "तुझे दुनिया में कुछ भी मिल जाये परन्तु तू तृप्त नहीं होगा, तृप्ति तभी मिलेगी जब तू मेरे और दूसरा सभी के हिस्से मे थोड़ा ्थोड़ा दुःख मिला दिया है पास आएगा ताकि तू लौट कर मेरै ही पास पहुँचे। " इस तरह हर किसी के जीवन मे थोड़ा दुःख है। जीवन का दुःख या विषाद हमें ईश्वर के पास लेे जाने के लिए है। लेकिन हम चूक जाते हैं। हमारी क्या है कि हर किसी को दुःख आता है, हम भागते है ज्योतिष समस्या अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के पास। कुछ होने वाला नहीं। के पास, थोड़ी देर का मानसिक संतोष बस, यदि दुखों से घबरायें नहीं और ईश्वर का प्रसाद समझ कर आगे बढ़े तो बात बन जाती है। यदि हम ईश्वर से विलग होने के दिनों को याद कर ले तो बात बन जाती है और जीव दुखों से भी पार हो जाता है। दुःख तो ईश्वर का प्रसाद है। ।ता ह्वैी दुरम योदक्वर कह प्रपदलै दूषख्ें मतलब है, ईश्वर का बुलावा का और दुःख बहुत से संतो के लिए ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बन विषाद चुका है। हमें ये बात अच्छे से समझनी चाहिए कि संसार मे हर चीज में अतृप्ति है और दुःख और विषाद ईश्वर प्राप्ति का साधन है। हर हर महादेव 214 38 25 Raja kumar 2d Ready to buzld the foundatzon of your acting # craft? See more 10.47 vE .ulll Mahakal Kripa Follow 1  "ईश्वर का प्रसाद है दुःख जब भगवान सृष्टि की रचना कर रहे थे, See more ईश्वर का प्रसाद है दुःख की रचना कर रहे थे, तो उन्होंने जीव को कहा कि तुम्हें जब भगवान सृष्टि जाना पड़ेगा , मैं सृष्टि की रचना करने जा रहा हूँl ये सुन जीव मृत्युलोक  की आँखों में आँसू आ गए, वो बोला "प्रभु! कुछ तो ऐसा करों की मैं लौटकर आपके पास ही आऊँ। ' भगवान को दया आ गई। उन्होंने दो कार्य किये जीव के लिए। पहला संसार की हर चीज़ में अतृप्ति मिला दी, और जीव से कहा- "तुझे दुनिया में कुछ भी मिल जाये परन्तु तू तृप्त नहीं होगा, तृप्ति तभी मिलेगी जब तू मेरे और दूसरा सभी के हिस्से मे थोड़ा ्थोड़ा दुःख मिला दिया है पास आएगा ताकि तू लौट कर मेरै ही पास पहुँचे। " इस तरह हर किसी के जीवन मे थोड़ा दुःख है। जीवन का दुःख या विषाद हमें ईश्वर के पास लेे जाने के लिए है। लेकिन हम चूक जाते हैं। हमारी क्या है कि हर किसी को दुःख आता है, हम भागते है ज्योतिष समस्या अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के पास। कुछ होने वाला नहीं। के पास, थोड़ी देर का मानसिक संतोष बस, यदि दुखों से घबरायें नहीं और ईश्वर का प्रसाद समझ कर आगे बढ़े तो बात बन जाती है। यदि हम ईश्वर से विलग होने के दिनों को याद कर ले तो बात बन जाती है और जीव दुखों से भी पार हो जाता है। दुःख तो ईश्वर का प्रसाद है। ।ता ह्वैी दुरम योदक्वर कह प्रपदलै दूषख्ें मतलब है, ईश्वर का बुलावा का और दुःख बहुत से संतो के लिए ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बन विषाद चुका है। हमें ये बात अच्छे से समझनी चाहिए कि संसार मे हर चीज में अतृप्ति है और दुःख और विषाद ईश्वर प्राप्ति का साधन है। हर हर महादेव 214 38 25 Raja kumar 2d Ready to buzld the foundatzon of your acting # craft? See more - ShareChat