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#मेरी हृदय मेरी माँ
मेरी हृदय मेरी माँ - कर्म होता है, पर योग नहीं होता जब चेतना सोई होती है कर्म बंधन बनता है धर्म भी स्वार्थ से जुड़ जाता है सेवा भी अहंकार से दूषित हो जाती है यानी जब इन्द्रियाँ राज करती हैं तो विवेक सोया रहता है। कर्म होता है, पर योग नहीं होता जब चेतना सोई होती है कर्म बंधन बनता है धर्म भी स्वार्थ से जुड़ जाता है सेवा भी अहंकार से दूषित हो जाती है यानी जब इन्द्रियाँ राज करती हैं तो विवेक सोया रहता है। - ShareChat