#सत_भक्ति_संदेश
गार अंगार क्रोध झल, निन्दा धूवां होय।
इन तीनों को परिहरै, साधु कहावै सोय।।
मुख से निकली गाली अमर्यादित बातें अंगार स्वरूप है, क्रोध उसकी झलकती आंच (तपन) है और पर निंदा उठते हुए धुएं के समान है।
अवश्य देखें साधना चैनल प्रतिदिन शाम07:30 बजे
##kabirisgod #kabir is real god #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇


