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#दर्द-ए-दिल
दर्द-ए-दिल - जिस पीडा ने आत्मा को झकझोरा है, वही पीडा सत्य के सबसे निकट लेे जाती है। इंसान घटनाओं से नहीं, उनसे उपजे मौन से परिवर्तित होता है। जब अपेक्षाएँ हैं टूटती तभी चेतना जन्म लेती है।दर्द मन को रिक्त करता है, ताकि समझ भर सके।और उसी रिक्तता में जीवन का वास्तविक अर्थ प्रकट होता है..!! जिस पीडा ने आत्मा को झकझोरा है, वही पीडा सत्य के सबसे निकट लेे जाती है। इंसान घटनाओं से नहीं, उनसे उपजे मौन से परिवर्तित होता है। जब अपेक्षाएँ हैं टूटती तभी चेतना जन्म लेती है।दर्द मन को रिक्त करता है, ताकि समझ भर सके।और उसी रिक्तता में जीवन का वास्तविक अर्थ प्रकट होता है..!! - ShareChat