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#pyar wali shayari
pyar wali shayari - ये समझदारी मुझे धीरे धीरे मार रही है मैं नादानों वाली एक शाम चाहता हूं तुम चाहते होंगे पहचान इस जहान में मैं तो मौत भी अपनी गुमनाम चाहता हूं। ये समझदारी मुझे धीरे धीरे मार रही है मैं नादानों वाली एक शाम चाहता हूं तुम चाहते होंगे पहचान इस जहान में मैं तो मौत भी अपनी गुमनाम चाहता हूं। - ShareChat