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#✍️ साहित्य एवं शायरी #एक रचना रोज़✍
✍️ साहित्य एवं शायरी - बना ले औजार आग को अफसोस तू अपनी खाक नही देख पाएगा तूझे मालूम नही हलक से अजल तक जबान एक ही है॰॰. बना ले औजार आग को अफसोस तू अपनी खाक नही देख पाएगा तूझे मालूम नही हलक से अजल तक जबान एक ही है॰॰. - ShareChat