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#kabir is real god #kabir #👌 दोहे #🙏शाम की आरती🪔 #📗प्रेरक पुस्तकें📘
kabir is real god - 3/4|4 (189-190) गीता अध्याय 3 श्लोक 6 से 8 में कहा हैं कि जो मूढ़ बुद्धि मनुष्य समस्त कर्म इन्द्रयों को रोककर अर्थात् हठ योग दूवारा एक स्थान पर बैठ कर या खडा वह मन से इन्द्रियों का चिन्तन होकर साधना करता है। ' करता रहता है। जैसे सर्दी लगी तो शरीर की चिन्ता , सर्दी का चिन्तन , भूख लगी तो भूख का चिन्तन आदि होता रहता है। वह हठ से तप करने वाला मिथ्याचारी अर्थात् दम्भी कहा जाता है। कार्य न करने अर्थात् एक स्थान पर बैठ या खडा होकर साधना करने की अपेक्षा कर्म करना तथा भक्ति भी करना श्रेष्ठ है। यदि कर्म नहीं करेगा तो निर्वाह भी नहीं सिद्ध होगा। तेरा शरीर SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI SUPREMEGOD.ORG l@in @SAINTRAMPALJIM SAINT RAMPAL JI MAHARAJ 3/4|4 (189-190) गीता अध्याय 3 श्लोक 6 से 8 में कहा हैं कि जो मूढ़ बुद्धि मनुष्य समस्त कर्म इन्द्रयों को रोककर अर्थात् हठ योग दूवारा एक स्थान पर बैठ कर या खडा वह मन से इन्द्रियों का चिन्तन होकर साधना करता है। ' करता रहता है। जैसे सर्दी लगी तो शरीर की चिन्ता , सर्दी का चिन्तन , भूख लगी तो भूख का चिन्तन आदि होता रहता है। वह हठ से तप करने वाला मिथ्याचारी अर्थात् दम्भी कहा जाता है। कार्य न करने अर्थात् एक स्थान पर बैठ या खडा होकर साधना करने की अपेक्षा कर्म करना तथा भक्ति भी करना श्रेष्ठ है। यदि कर्म नहीं करेगा तो निर्वाह भी नहीं सिद्ध होगा। तेरा शरीर SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI SUPREMEGOD.ORG l@in @SAINTRAMPALJIM SAINT RAMPAL JI MAHARAJ - ShareChat