ShareChat
click to see wallet page
search
#😒दर्द भरी शायरी🌸 #💝 शायराना इश्क़ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
😒दर्द भरी शायरी🌸 - Ves 56+ 9.24 NR कुछ पक्तियाँ khud पर भी ! মীব ফ্কৌ হূ ক্ধি মাহী নিমী क्या यूँ॰ ही निकल जाएगी। रोज वही सुबह रोज वही शाम अकेली घर में बैठ, कर रही हूँ बस 3TRTH न कहीं आना न कहीं जाना लोगों से न मिलना बस खुद में ही खोए 677/ सपने तो बोहोत देखती हूं पर उन्हें पूरा करने से कतराती हूं। डर लगता है अपनों को खाने से इसलिए नए रिश्ते भी नहीं बना पाती हूँ। लोग हैं हाल मेरा तो 'ठीक है' पूछते कहकर निकल जाती हूँ | कोई समझता ही नहीं मुझे इसलिए शायद में ही खुद को समझाती हूँ आस लगाए बैठी हूँ कोई नई मंजिल मिल जाएगी | सोच रही हूं॰ कि सारी जिंदगी क्या ಶ್ಲೆ೩ Fಫ೯ जाएगी । ` [cce೪೯s ಗ' a Ves 56+ 9.24 NR कुछ पक्तियाँ khud पर भी ! মীব ফ্কৌ হূ ক্ধি মাহী নিমী क्या यूँ॰ ही निकल जाएगी। रोज वही सुबह रोज वही शाम अकेली घर में बैठ, कर रही हूँ बस 3TRTH न कहीं आना न कहीं जाना लोगों से न मिलना बस खुद में ही खोए 677/ सपने तो बोहोत देखती हूं पर उन्हें पूरा करने से कतराती हूं। डर लगता है अपनों को खाने से इसलिए नए रिश्ते भी नहीं बना पाती हूँ। लोग हैं हाल मेरा तो 'ठीक है' पूछते कहकर निकल जाती हूँ | कोई समझता ही नहीं मुझे इसलिए शायद में ही खुद को समझाती हूँ आस लगाए बैठी हूँ कोई नई मंजिल मिल जाएगी | सोच रही हूं॰ कि सारी जिंदगी क्या ಶ್ಲೆ೩ Fಫ೯ जाएगी । ` [cce೪೯s ಗ' a - ShareChat