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#✍️ साहित्य एवं शायरी #जिंदगी शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - मैं शायरियां नही बनाता अपने दिल में छुपी हर बात लिखता हूं॰ जिंदगी में कितना गिरा कितना संभला अपने हर हालात लिखता हूं॰ मगर ये दिल सोचना पता नही कब बंद करेगा, एक दिन ये सोचना बंद कर देगा इसी आश में॰ कभी सुबह कभी शाम और कभी कभी दिन रात लिखता हूं मैं शायरियां नही बनाता अपने दिल में छुपी हर बात लिखता हूं॰ जिंदगी में कितना गिरा कितना संभला अपने हर हालात लिखता हूं॰ मगर ये दिल सोचना पता नही कब बंद करेगा, एक दिन ये सोचना बंद कर देगा इसी आश में॰ कभी सुबह कभी शाम और कभी कभी दिन रात लिखता हूं - ShareChat