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#✍️ साहित्य एवं शायरी #📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार
✍️ साहित्य एवं शायरी - मैं लिख पाऊं कुछ तो, मैं खुद  को लिखूंगी. ख़ुद के हिस्से का, दर्द, लिखूंगी... वो 9 मायूसी ग़म सब दिन, वो रोती हुई रातें लिखूंगी.. कुछ ख़्वाब अधूरे, कुछ शिकायतें लिखूंगी.. कुछ शोर अपना, कुछ सन्नाटे लिखूंगी... मैं लिख पाऊं कुछ तौ , मैं ख़ुद को ٨؟٨،،،!! मैं लिख पाऊं कुछ तो, मैं खुद  को लिखूंगी. ख़ुद के हिस्से का, दर्द, लिखूंगी... वो 9 मायूसी ग़म सब दिन, वो रोती हुई रातें लिखूंगी.. कुछ ख़्वाब अधूरे, कुछ शिकायतें लिखूंगी.. कुछ शोर अपना, कुछ सन्नाटे लिखूंगी... मैं लिख पाऊं कुछ तौ , मैं ख़ुद को ٨؟٨،،،!! - ShareChat