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#ओम नमो भगवते वासुदेवाय
ओम नमो भगवते वासुदेवाय - அிர की आरती ऊँ जय जगदीश हरे, प्रभु जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट , क्षॅण में दूर करे।। ऊँ जय जगदीश हरे। जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मनका। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तनका। । ऊँ जय जगदीश हरे। मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन औरुँ न दूजा, आस करू जिसकी। | ऊँ जय जगदीश हरे। तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।  परमेश्वर  तुम सबके स्वामी। ।  पारब्रह्म ऊँ जय जगदीश हरे। तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता| मै मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता। । ऊँ जय जगर्दीश हरे। अगोचर सबके प्राणपति। तुम हो एक Ra ক্িম নিখি मैं कुमति ।। तुमको " दयामय ऊँ जय जगदीश हरे। मेरे। दीनबन्धु, दुखहर्ता ठाकुर तुम अपने हाथ उठाओ , द्वार पड़ा तेरे।। ऊँ जय जगदीश हरे। विषय विकार मिटाओ , पाप हरो देवा। श्रद्धानभक्ति बढ़ाओ , संतन की सेवा।। ऊँ जय जगदीश हरे। ऊँ जय जगदीश हरे , प्रभु जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट , क्षॅण में दूर करे। । ऊँ जय जगदीश हरे। ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ அிர की आरती ऊँ जय जगदीश हरे, प्रभु जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट , क्षॅण में दूर करे।। ऊँ जय जगदीश हरे। जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मनका। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तनका। । ऊँ जय जगदीश हरे। मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। तुम बिन औरुँ न दूजा, आस करू जिसकी। | ऊँ जय जगदीश हरे। तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।  परमेश्वर  तुम सबके स्वामी। ।  पारब्रह्म ऊँ जय जगदीश हरे। तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता| मै मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता। । ऊँ जय जगर्दीश हरे। अगोचर सबके प्राणपति। तुम हो एक Ra ক্িম নিখি मैं कुमति ।। तुमको " दयामय ऊँ जय जगदीश हरे। मेरे। दीनबन्धु, दुखहर्ता ठाकुर तुम अपने हाथ उठाओ , द्वार पड़ा तेरे।। ऊँ जय जगदीश हरे। विषय विकार मिटाओ , पाप हरो देवा। श्रद्धानभक्ति बढ़ाओ , संतन की सेवा।। ऊँ जय जगदीश हरे। ऊँ जय जगदीश हरे , प्रभु जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट , क्षॅण में दूर करे। । ऊँ जय जगदीश हरे। ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ - ShareChat