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- It's Dk🫥Gupta#सत्संग #श्री राजन जी महाराज की अमृतवाणी #राजन जी महाराज #पूज्य राजन महाराज जी के अनमोल वचन🙏 #पूज्य राजन जी महाराज81251
- राकेश कुमार##सत्संग_सुख_का_सागर सत्संग मतलब सत्य का संग अर्थात जो संत सत्संग कर रहा हो उनके मुख से बोली गयी बातो #संत का सत्संग #🙏गुरु महिमा😇 #भक्ति #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स160391
- sn vyas##सत्संग_सुख_का_सागर सत्संग मतलब सत्य का संग अर्थात जो संत सत्संग कर रहा हो उनके मुख से बोली गयी बातो #भक्ति #कथा कथा-श्रवण के प्रमुख अंग 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ शास्त्रों में भगवान की कथा का श्रवण केवल एक धार्मिक परम्परा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, चित्त-परिष्कार और भगवत्प्राप्ति का श्रेष्ठ साधन माना गया है। किन्तु कथा का वास्तविक फल तभी प्राप्त होता है जब श्रोता उचित भाव, पात्रता और आन्तरिक तैयारी के साथ कथा का श्रवण करे। यदि मन में श्रद्धा, जिज्ञासा और निर्मत्सरता का अभाव हो, तो कथा सुनना केवल कानों तक सीमित रह जाता है; वह हृदय को स्पर्श नहीं कर पाती। अतः प्रत्येक साधक को निम्नलिखित अंगों का विशेष रूप से पालन करना चाहिए— 1. श्रद्धा 〰️〰️〰️ कथा-श्रवण का प्रथम और सर्वाधिक आवश्यक अंग श्रद्धा है। श्रद्धा के बिना न तो ज्ञान की प्राप्ति होती है और न ही भक्ति का विकास होता है। श्रोता को चाहिए कि वह अपने मन को संसार के विषयों से हटाकर पूर्ण एकाग्रता के साथ भगवान की कथा का श्रवण करे। श्रद्धा का अर्थ केवल कथा-स्थल पर उपस्थित होना नहीं है, बल्कि यह दृढ़ विश्वास होना चाहिए कि भगवान की कथा दिव्य, पवित्र और कल्याणकारी है। जब श्रोता श्रद्धापूर्वक कथा सुनता है, तब कथा का प्रत्येक शब्द उसके अन्तःकरण में प्रवेश कर उसके जीवन को परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। यदि मन इधर-उधर भटकता रहे, कथा को सामान्य वार्ता समझकर सुना जाए अथवा केवल औपचारिकता निभाई जाए, तो कथा का वास्तविक लाभ प्राप्त नहीं होता। अतः श्रद्धा ही कथा-श्रवण का मूल आधार है। 2. जिज्ञासा 〰️〰️〰️〰️ कथा-श्रवण का दूसरा महत्त्वपूर्ण अंग जिज्ञासा है। श्रोता के हृदय में भगवान, धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक जीवन के विषय में जानने की प्रबल इच्छा होनी चाहिए। जिज्ञासा के अभाव में मन कभी एकाग्र नहीं हो सकता। जिस व्यक्ति के भीतर सत्य को जानने की उत्कट अभिलाषा नहीं होती, वह कथा के गूढ़ रहस्यों को ग्रहण नहीं कर पाता। केवल समय बिताने या सामाजिक परम्परा निभाने के उद्देश्य से कथा सुनने वाला व्यक्ति कथा के अमृतरस से वंचित रह जाता है। जब श्रोता के मन में यह भाव रहता है कि "मैं भगवान को अधिक जानूँ, उनके स्वरूप, गुण, लीला और तत्त्व को समझूँ तथा अपने जीवन को उनके अनुरूप बनाऊँ", तब कथा उसके लिए ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का स्रोत बन जाती है। अतः कथा-श्रवण सदैव जिज्ञासापूर्ण मन से करना चाहिए, क्योंकि जिज्ञासा ही ज्ञान के द्वार खोलती है। 3. निर्मत्सरता 〰️〰️〰️〰️〰️ कथा-श्रवण का तीसरा और अत्यन्त आवश्यक अंग निर्मत्सरता है। 'मत्सर' का अर्थ है—ईर्ष्या, द्वेष और दूसरे के सुख या उन्नति को देखकर दुःखी होना। शास्त्र कहते हैं कि भगवान की कथा का अधिकारी वही है जिसके हृदय में किसी भी प्राणी के प्रति ईर्ष्या का भाव न हो। श्रोता को कथा में अत्यन्त दीनता, विनम्रता और सरलता के साथ उपस्थित होना चाहिए। अपने अहंकार, द्वेष, वैमनस्य और दुर्भावना को बाहर ही छोड़कर कथा-स्थल में प्रवेश करना चाहिए। जो व्यक्ति अपने पापों का त्याग करने का संकल्प लेकर, भगवान से मिलने की तीव्र आतुरता तथा निष्कपट भक्ति की भावना से कथा का श्रवण करता है, उसके हृदय में भगवान स्वयं प्रकट होने लगते हैं। निर्मल हृदय में ही भगवद्भक्ति का उदय होता है। जहाँ ईर्ष्या, अहंकार और द्वेष का अन्धकार है, वहाँ कथा का दिव्य प्रकाश स्थिर नहीं हो सकता। इसलिए कथा-श्रवण से पूर्व अपने अन्तःकरण को निर्मल बनाने का सतत प्रयास करना ही सच्चे साधक का धर्म है। उपसंहार 〰️〰️〰️ अतः भगवान की कथा का वास्तविक फल प्राप्त करने के लिए केवल कथा सुन लेना पर्याप्त नहीं है। श्रोता को श्रद्धा, जिज्ञासा और निर्मत्सरता—इन तीनों गुणों से युक्त होकर कथा का श्रवण करना चाहिए। श्रद्धा से मन स्थिर होता है, जिज्ञासा से ज्ञान प्राप्त होता है और निर्मत्सरता से हृदय भगवान की कृपा का पात्र बनता है। जब ये तीनों गुण एक साथ श्रोता के जीवन में प्रकट होते हैं, तब कथा केवल श्रवण का विषय नहीं रहती, बल्कि वह साधक के जीवन को भगवन्मय बनाकर उसे आत्मकल्याण और परमात्मप्राप्ति के पथ पर अग्रसर करती है। ।। जय श्री कृष्ण ।। साभार~ पं देव शर्मा🔥 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️1111
- Santanu Sahu🔥🔥अब आओ मैदान में,,, अब होगा ज्ञान का महासंग्राम,,, यह जितने भी आचार्य शंकराचार्य कथावाचक धर्मगुरू हैं हम सभी से प्रार्थना करते हैं अब चुप मत बैठो एक शास्त्रार्थ कर दो और समाज को एक निर्णायक ज्ञान दो,,, ताकि जनता का आपस में विरोधाभास खत्म हो जाए,,,, और दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए,,, कि परमात्मा कौन है कैसा है और कैसे मिलता है और हमें परमात्मा की क्यों और क्या आवश्यकता है इन सभी प्रश्नों के उत्तर दो,,, संत रामपाल जी महाराज जी से ज्ञान चर्चा करो अब कोई भागेगा नहीं… #kabirisgod #santrampaljimaharaj #trendingreels #everyone #indian #CNNNews18 #सत्संग #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇1413
- •͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎🔥آ͢آ ਨਵਾਬ آ͢آ🔥##सत्संग_सुख_का_सागर सत्संग मतलब सत्य का संग अर्थात जो संत सत्संग कर रहा हो उनके मुख से बोली गयी बातो #संत का सत्संग #राधा सुआमी शब्द पंक्तियो सहित #राधा सुआमी सत्संग ब्यास #राधा सुआमी शब्द #ब्यास शब्द #शब्द #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕1415
- Ranju Kumari#संतमत सत्संग म #संतमत संत सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के समर्थक जय गुरु महाराज1115
- sn vyas##सत्संग_सुख_का_सागर सत्संग मतलब सत्य का संग अर्थात जो संत सत्संग कर रहा हो उनके मुख से बोली गयी बातो सत्संग का सरल अर्थ है—'सत्य का संग' यानी ऐसे लोगों का साथ जो आत्मिक रूप से ऊंचे हों, जिनके विचार पवित्र हों और जिनके साथ रहने से हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। भारतीय संस्कृति में सत्संग को जीवन बदलने वाला माध्यम माना गया है। इसे समझने के लिए आइए एक सुंदर और प्रेरणादायक कहानी पढ़ते हैं। एक बार की बात है, एक जंगल में एक पहुंचे हुए संत अपनी कुटिया बनाकर रहते थे। उनके पास एक 'पारस पत्थर' था, जिसके स्पर्श से लोहा भी सोना बन जाता था। उसी गांव में एक डाकू रहता था, जिसका नाम था रामचरण। वह बहुत क्रूर था और लोगों को लूटना ही उसका काम था। जब उसे पता चला कि साधु के पास पारस पत्थर है, तो उसके मन में लालच आ गया। उसने सोचा, "अगर वह पत्थर मुझे मिल जाए, तो मुझे जिंदगी भर चोरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।" एक रात वह चोरी के इरादे से साधु की कुटिया में घुस गया। साधु महाराज ध्यान में लीन थे। रामचरण चुपके से पत्थर ढूंढने लगा, लेकिन तभी साधु की आंखें खुल गईं। साधु ने उसे देखकर न तो गुस्सा किया और न ही चिल्लाए। उन्होंने बड़े शांत और मधुर स्वर में कहा, "आओ बेटा, बैठो। तुम इतनी रात को इतनी दूर से आए हो, थक गए होगे। पहले थोड़ा जल ग्रहण करो।" रामचरण हैरान रह गया। उसने तलवार खींच ली और कहा, "मुझे तुम्हारा पानी नहीं चाहिए! मुझे वह पारस पत्थर दे दो, नहीं तो मैं तुम्हारी जान ले लूंगा।" साधु मुस्कुराए और बोले, "बस इतनी सी बात? वह पत्थर बाहर झाड़ियों के पास पड़ा है, जाकर उठा लो। मेरे लिए उसका कोई मूल्य नहीं है।" रामचरण झपटकर बाहर गया और उसने पत्थर ढूंढ लिया। वह सचमुच पारस पत्थर ही था। रामचरण खुश हो गया, लेकिन जैसे ही वह जाने लगा, उसके कदम रुक गए। उसके मन में एक गहरा विचार आया: "इस पत्थर से तो लोहा सोना बनता है, लेकिन जिस साधु के पास यह पत्थर है, उसे इस सोने का कोई लालच ही नहीं है। वह कितना शांत और सुखी है! इसका मतलब इस पत्थर से भी बड़ी कोई दौलत है, जो इस साधु के पास है।" वह वापस कुटिया में गया, पारस पत्थर साधु के चरणों में रख दिया और रोते हुए बोला, "महाराज, मुझे यह पत्थर नहीं चाहिए। मुझे वह धन चाहिए जिससे आपके चेहरे पर यह संतोष और शांति है। मुझे अपने चरणों में शरण दे दीजिए।" साधु ने उसे गले लगा लिया और उसे ज्ञान की राह दिखाई। वह क्रूर डाकू सत्संग के प्रभाव से एक महान संत बन गया। सत्संग का महत्व संत कबीर दास जी ने सत्संग के महत्व को समझाते हुए बहुत सुंदर बात कही है: "कबीर संगत साधु की, जौ कीजै कड़े बार। लोहा कंचन होत है, परसत पारस डार।।" सत्संग का हमारे जीवन में निम्नलिखित महत्व है: कुसंगति का नाश: जैसे एक गंदे नाले का पानी गंगा में मिलकर गंगाजल बन जाता है, वैसे ही बुरे से बुरा व्यक्ति भी संतों की संगति में आकर सुधर जाता है। मानसिक शांति: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव आम है। सत्संग में जाने से मन को असीम शांति और सकारात्मकता मिलती है। सही और गलत की पहचान: सत्संग हमारे भीतर के विवेक को जगाता है। हमें समझ आता है कि जीवन का असली उद्देश्य क्या है और हमें किस मार्ग पर चलना चाहिए। अहंकार की समाप्ति: जब हम ज्ञानी और गुणी लोगों के बीच बैठते हैं, तो हमारा 'मैं' (अहंकार) धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है और हम विनम्र बनते हैं। जैसे पारस लोहे को सोना बनाता है, वैसे ही सत्संग इंसान के चरित्र को सोना बना देता है। इसलिए जीवन में जब भी अवसर मिले, अच्छे विचारों और अच्छे लोगों का संग (सत्संग) जरूर करना चाहिए।1215
- राकेश कुमार#जय गौ माता 🙏 ##सत्संग_सुख_का_सागर सत्संग मतलब सत्य का संग अर्थात जो संत सत्संग कर रहा हो उनके मुख से बोली गयी बातो #संत का सत्संग #भक्ति #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स150435
- Santanu Sahu#रोटीकपड़ा_चिकित्सा_शिक्षामकान नानसलाई, महीसागर, गुजरात की सविता बहन के पति की मृत्यु हो गयी थी। टूटी झोपड़ी में रहते थे। ऐसे में संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम बनी परिवार के लिए वरदान। संत रामपाल जी महाराज जी ने गरीब परिवार को पक्का मकान बनवाकर दिया। AnnapurnaMuhim SantRampalJi #सत्संग #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏कर्म क्या है❓1412
- •͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎͎🔥آ͢آ ਨਵਾਬ آ͢آ🔥#सत्संग ##सत्संग_सुख_का_सागर सत्संग मतलब सत्य का संग अर्थात जो संत सत्संग कर रहा हो उनके मुख से बोली गयी बातो #😇मन शांत करने के उपाय #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #☝ मेरे विचार911