“शिक्षा की देवी – माता सावित्रीबाई फुले”
माननीय अध्यक्ष महोदय,
मंचासीन अतिथिगण,
मेरे आदरणीय गुरुजन,
और मेरे प्यारे साथियो —
सभी को मेरा क्रांतिकारी नमस्कार! ✊
आज हम यहाँ किसी साधारण महिला की जयंती मनाने नहीं,
बल्कि एक क्रांति की जननी,
एक विचार की मशाल,
और शिक्षा की देवी — माता सावित्रीबाई फुले जी को नमन करने के लिए एकत्र हुए हैं।
🙏🌸
साथियो,
आज से लगभग 175 वर्ष पहले,
जब देश में
❌ लड़कियों को पढ़ना पाप माना जाता था,
❌ शूद्र-अतिशूद्र को शिक्षा से दूर रखा जाता था,
❌ और स्त्री को केवल चूल्हा-चौका समझा जाता था —
उस अंधेरे समय में
एक महिला ने दीपक उठाया।
उस महिला का नाम था —
👉 सावित्रीबाई फुले!
जब सावित्रीबाई फुले स्कूल पढ़ाने जाती थीं,
तो लोग उन पर
❌ कीचड़ फेंकते थे,
❌ गोबर फेंकते थे,
❌ गालियाँ देते थे।
लेकिन साथियो,
उन्होंने स्कूल जाना बंद नहीं किया।
क्योंकि उन्हें पता था —
शिक्षा ही गुलामी की जंजीर तोड़ेगी।
उन्होंने कहा था —
“जिस समाज में स्त्री शिक्षित नहीं,
वह समाज कभी आगे नहीं बढ़ सकता।”
आज जो हम
📚 किताब हाथ में,
🎓 डिग्री हाथ में,
✍️ कलम हाथ में लिए खड़े हैं —
उसके पीछे
माता सावित्रीबाई फुले का बलिदान है।
साथियो,
सावित्रीबाई फुले
✔ भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं,
✔ पहली नारी मुक्ति आंदोलन की प्रणेता थीं,
✔ विधवा पुनर्विवाह,
✔ बालिका शिक्षा,
✔ जाति-उन्मूलन की अग्रदूत थीं।
उन्होंने समाज को सिखाया —
जाति से नहीं,
कर्म और ज्ञान से इंसान की पहचान होती है।
आज सवाल यह है —
❓ क्या हम उनके विचारों पर चल रहे हैं?
❓ क्या आज भी लड़कियाँ डर में जी रही हैं?
❓ क्या आज भी शिक्षा सब तक बराबर पहुँची है?
अगर जवाब “नहीं” है —
तो साथियो,
👉 सावित्रीबाई फुले जयंती मनाना तभी सार्थक होगा
जब हम उनके विचारों को अपनाएँ।
✊ आज का संकल्प
आइए, आज हम संकल्प लें —
📖 हर बेटी को पढ़ाएंगे
🚫 जाति-भेद का विरोध करेंगे
⚖️ समान शिक्षा, समान अधिकार की लड़ाई लड़ेंगे
🔥 अंधविश्वास नहीं, विज्ञान अपनाएँगे
क्योंकि —
कलम जब चलती है,
तो तलवार अपने आप झुक जाती है।
अंत में मैं बस इतना कहना चाहूँगा —
🌸 शिक्षा की देवी
🌸 नारी मुक्ति की मशाल
🌸 महान समाजसेविका
माता सावित्रीबाई फुले जी
आपका संघर्ष हमें रास्ता दिखाता रहेगा।
🙏 कोटि-कोटि नमन!
✊ जय सावित्रीबाई!
✊ जय शिक्षा!
✊ जय समानता! #सावित्री बाई फुले जयंती 🙏


