ShareChat
click to see wallet page
search
##ब्रेकिंग न्यूज़🙏 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🎞️आज के वायरल अपडेट्स
#ब्रेकिंग न्यूज़🙏 - आयु प्रमाणपत्र होने पर उम्र के लिए मेडिकल जांच जरूरी नहीं : हाईकोर्ट निचली अदालत के आदेश को किया रद्द , नाबालिग आरोपी को मिली जमानत संवाद न्यूज एजेंसी  से कहा गया कि घटना के समय उपलब्ध न हों तभी नगर निकाय के उम्र १६ साल से कम थी। पर   विचार বমন্ধী किया जन्म प्रमाणपत्र लखनऊ।   हाईकोर्ट की लखनऊ সমাণপন্   স जाए और इन सवके अभाव में ही उसके 85 स्कूल ಗೆ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जनवरी  २०१० और मेडिकल जांच कराई जा सकती है। जन्मतिथि कहा है कि अगर किसी नावालिंग प्राथमिक स्कूल रिकॉर्ड में १३ मई कोर्ट कि ने पाया उपलव्ध की   उम्र কনে ক  লিব थी। इसके   बावजूद दस्तावेजों से साफ है कि आरोपी सावित 2009 दज इसलिए   मेडिकल स्कूल, शिक्षा बोर्ड या नगर निकाय करते हुए नावालिंग को जमानत पर किशोर न्याय वोर्ड ने उसकी उम्र तय नावालिंग  था के प्रमाणपत्र मौजूद हों॰ तो उसकी रिहा करने का निर्देश दिया। रकरने के लिए मेडिकल जांच का जांच का आदेश देना गलत था। देते हुए उम्र तय करने के लिए मेडिकल मामला प्रतापगढ़ जिले का है  f4[, कोर्ट ने उसे सशर्त जमानत নিম ٨٩٠٨ 5 आदेश कराना   गैरकानूनो है। यह निर्देश दिया कि वह एक साल तक अदालत ने भी सही माना। जहां ११ मार्च को एक नावालिंग जांच 8  = फैसला न्यायमूर्ति मनीष कुमार को हाईकोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय हर महीने की १० तारीख को अपने लड़के पर १५ साल की लडको एकल पोठ ने एक नावालिंग आरोपो छेड़छाड़ धमकी देने   का अधिनियम  २०१५ कीधारा ९४ के अभिभावक के साथ जिला परिवीक्षा और की पुनर्विचार याचिका पर  दिया। तय करने के लिए उसके   खिलाफ अधिकारी के सामने पेश होगा और आरोप   लगा अनुसार 37 9 ন্ধীয ৯ ন্িহা যায নীভ সাঁ पॉक्सो एक्ट और अन्य धाराओं में स्कूल या बोर्ड के किसी भो आपराधिक गतिविधि से सवस पहल पॉक्सो अदालत के आदेशों को रद्द केस दर्ज हुआ था। आरोपी की ओर प्रमाणपत्र देखे जाने चाहिए। अगर ये टूर रहगा। आयु प्रमाणपत्र होने पर उम्र के लिए मेडिकल जांच जरूरी नहीं : हाईकोर्ट निचली अदालत के आदेश को किया रद्द , नाबालिग आरोपी को मिली जमानत संवाद न्यूज एजेंसी  से कहा गया कि घटना के समय उपलब्ध न हों तभी नगर निकाय के उम्र १६ साल से कम थी। पर   विचार বমন্ধী किया जन्म प्रमाणपत्र लखनऊ।   हाईकोर्ट की लखनऊ সমাণপন্   স जाए और इन सवके अभाव में ही उसके 85 स्कूल ಗೆ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जनवरी  २०१० और मेडिकल जांच कराई जा सकती है। जन्मतिथि कहा है कि अगर किसी नावालिंग प्राथमिक स्कूल रिकॉर्ड में १३ मई कोर्ट कि ने पाया उपलव्ध की   उम्र কনে ক  লিব थी। इसके   बावजूद दस्तावेजों से साफ है कि आरोपी सावित 2009 दज इसलिए   मेडिकल स्कूल, शिक्षा बोर्ड या नगर निकाय करते हुए नावालिंग को जमानत पर किशोर न्याय वोर्ड ने उसकी उम्र तय नावालिंग  था के प्रमाणपत्र मौजूद हों॰ तो उसकी रिहा करने का निर्देश दिया। रकरने के लिए मेडिकल जांच का जांच का आदेश देना गलत था। देते हुए उम्र तय करने के लिए मेडिकल मामला प्रतापगढ़ जिले का है  f4[, कोर्ट ने उसे सशर्त जमानत নিম ٨٩٠٨ 5 आदेश कराना   गैरकानूनो है। यह निर्देश दिया कि वह एक साल तक अदालत ने भी सही माना। जहां ११ मार्च को एक नावालिंग जांच 8  = फैसला न्यायमूर्ति मनीष कुमार को हाईकोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय हर महीने की १० तारीख को अपने लड़के पर १५ साल की लडको एकल पोठ ने एक नावालिंग आरोपो छेड़छाड़ धमकी देने   का अधिनियम  २०१५ कीधारा ९४ के अभिभावक के साथ जिला परिवीक्षा और की पुनर्विचार याचिका पर  दिया। तय करने के लिए उसके   खिलाफ अधिकारी के सामने पेश होगा और आरोप   लगा अनुसार 37 9 ন্ধীয ৯ ন্িহা যায নীভ সাঁ पॉक्सो एक्ट और अन्य धाराओं में स्कूल या बोर्ड के किसी भो आपराधिक गतिविधि से सवस पहल पॉक्सो अदालत के आदेशों को रद्द केस दर्ज हुआ था। आरोपी की ओर प्रमाणपत्र देखे जाने चाहिए। अगर ये टूर रहगा। - ShareChat