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#भगवत गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
भगवत गीता - संजय उवाच इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः| भीतमेनभूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा Il आश्ासयामास च संजय बोले- वासदेव भगवान ने अर्जनके प्रति इस प्रकार कहकर फिर वैसे ही अपने चतुर्भुज रूप को दिखाया और फिर महात्मा श्रीकृष्ण ने सौम्यमू्ति होकर इस भयभीत अर्जून कोधीरज दिया [[|50|[| ಖr: इस श्लोक में  संजय महाराज धृतराष्ट्र को बताते हैं कि भगवान श्री कृष्णने अर्जुनको। विराट रूपको दर्शन करवा दिया और फिर अपनी आदर्शरूपमें प्रिकट हए इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वक रूपं दशयामास भूयःः यहाँ पर भगवानिश्री किष्णने अर्जनसेेविराट रूपकावर्णनोकिया और फिर अपना वास्तविक रूप प्रकट किया[ आश्र्चासयामासच भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्माः: भावान कृष्णने अर्जुन को शांति और सुरक्षा का आश्वासन दिया।चे पहले विराट रूपॅमें प्रकट हए जिससे अर्जुन भयभीतहोगएथेः और फिर अपने सामान्य सौम्य रूप मेप्रकट हए ताकि अर्जन को मिल सका सत्वना श्लोक यह दर्शाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को अपने 45 दिव्य स्वरूप को पूरी शक्ति और भव्यता का अनुभव कराया, लेकिन साथही अर्जुन की भावनाओं का भी सम्मान किया और उन्हें अपनी स्नेहिल और प्रिय रूप में दिर्शन देकर उन्हें सांत्वना दी। संजय उवाच इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः| भीतमेनभूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा Il आश्ासयामास च संजय बोले- वासदेव भगवान ने अर्जनके प्रति इस प्रकार कहकर फिर वैसे ही अपने चतुर्भुज रूप को दिखाया और फिर महात्मा श्रीकृष्ण ने सौम्यमू्ति होकर इस भयभीत अर्जून कोधीरज दिया [[|50|[| ಖr: इस श्लोक में  संजय महाराज धृतराष्ट्र को बताते हैं कि भगवान श्री कृष्णने अर्जुनको। विराट रूपको दर्शन करवा दिया और फिर अपनी आदर्शरूपमें प्रिकट हए इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वक रूपं दशयामास भूयःः यहाँ पर भगवानिश्री किष्णने अर्जनसेेविराट रूपकावर्णनोकिया और फिर अपना वास्तविक रूप प्रकट किया[ आश्र्चासयामासच भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्माः: भावान कृष्णने अर्जुन को शांति और सुरक्षा का आश्वासन दिया।चे पहले विराट रूपॅमें प्रकट हए जिससे अर्जुन भयभीतहोगएथेः और फिर अपने सामान्य सौम्य रूप मेप्रकट हए ताकि अर्जन को मिल सका सत्वना श्लोक यह दर्शाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को अपने 45 दिव्य स्वरूप को पूरी शक्ति और भव्यता का अनुभव कराया, लेकिन साथही अर्जुन की भावनाओं का भी सम्मान किया और उन्हें अपनी स्नेहिल और प्रिय रूप में दिर्शन देकर उन्हें सांत्वना दी। - ShareChat