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-Manoj Chauhan
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!!सुबह होती नहीं!! ये किन किनारों पर रूकी है नींद मेरी, इस सिरे तक पहुंचती नही ! बड़ी लम्बी हो रहीं हैं रातें, क्यों पलक झपकते ही सुबहें होती नहीं ! लेखक:-मनोज चौहान, 🌹✍️...
#🌷..chauhan..💐🌺
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