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जय श्री राम #जय श्री राम#जय श्री राम
जय श्री राम - श्री रामचरितमानस की शुभ फलदायक "सम्पुट चोपाइयाँ"  ٨   सम्ायण a २१ १. मंगल भवन अमंगल हारी, द्रबहु सु बिहारी 4 "omvತ' पवनसुत पावन नामु, अपने राखै रामु | R २ सुर नर मुनि सब होही  ३. देवि पूज्य पद कमल सुखारे। নুদ্কাই त्रिभुवन  विश्वनाथ मम् नाथ महिमा विदित पुरारी, గౌగT 8 ५. सो तुम्ह जान्हउ अन्तर्यामी, पुरवहु मोर मनोरथ स्वामी I / ६. सखा सोच त्यागहु बल मोरे, सब बिधि घटब काज मैं तोरे । सुधारिहि सो सब भाँती, जासु कृपा नहीं कृपा अघाती ৩. সী बिरिदु समभारी, हरहु नाथ मम् संकट भारी ८. दीन दयाल ९. प्रभु की कृपा भयवु सब काजू जन्म हमार सुफल भा आजू सीताराम चरन रति मोरे बढवु अनुग्रह तोरे | अनुदिन १० ११. सिया राम मैं सब जग जानी, करहु प्रनाम जोरि जुग पाणी १२. मोरे हित हरि सम नहीं कोउ, यहि अवसर सहाय सोई होउ महवीर बिनवउँ हनुमाना, राम जासु जस आप बखाना  ?3. जेहि बिधि प्रभु प्रसन्न मन होई, करुणा सागर कीजै सोई | १४ श्री रामचरितमानस की शुभ फलदायक "सम्पुट चोपाइयाँ"  ٨   सम्ायण a २१ १. मंगल भवन अमंगल हारी, द्रबहु सु बिहारी 4 "omvತ' पवनसुत पावन नामु, अपने राखै रामु | R २ सुर नर मुनि सब होही  ३. देवि पूज्य पद कमल सुखारे। নুদ্কাই त्रिभुवन  विश्वनाथ मम् नाथ महिमा विदित पुरारी, గౌగT 8 ५. सो तुम्ह जान्हउ अन्तर्यामी, पुरवहु मोर मनोरथ स्वामी I / ६. सखा सोच त्यागहु बल मोरे, सब बिधि घटब काज मैं तोरे । सुधारिहि सो सब भाँती, जासु कृपा नहीं कृपा अघाती ৩. সী बिरिदु समभारी, हरहु नाथ मम् संकट भारी ८. दीन दयाल ९. प्रभु की कृपा भयवु सब काजू जन्म हमार सुफल भा आजू सीताराम चरन रति मोरे बढवु अनुग्रह तोरे | अनुदिन १० ११. सिया राम मैं सब जग जानी, करहु प्रनाम जोरि जुग पाणी १२. मोरे हित हरि सम नहीं कोउ, यहि अवसर सहाय सोई होउ महवीर बिनवउँ हनुमाना, राम जासु जस आप बखाना  ?3. जेहि बिधि प्रभु प्रसन्न मन होई, करुणा सागर कीजै सोई | १४ - ShareChat