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#✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #💰आर्थिक समस्याओं का समाधान🔯 #🔯वास्तु दोष उपाय #🌸 सत्य वचन
✡️ज्योतिष समाधान 🌟 - उच्चाटन मन्त्र 1 Hச =7 "३० वीर वीर महावीर , सात समुद्र क देवदत्त ' के ऊपर चौकी चढ़े , हियो फोड़ चोटीं चढ़े। सांस लाल लंगोट तेल नआवे पड्यो रहे, काया माहि जीव रहे सिंदूर  पूजा मांगे महावीर। अंतर कपडा पर तेल सिंदूर  हजरत वीर की चौकी रहे। ३४० नमो आदेश! आदेश!! आदेश!!! " विधि- यह प्रयोग ' मारण ्कर्म' के समान ही भयावह प्रयोग है। इसलिए इस मन्त्र को सामान्यतः किसी व्यक्ति के अहित के लिए प्रयोग नहीं करना चाहिए। उक्त मन्त्र में जहाँ देवदत्त' आया है, वहाँ उस বান্কিব নিমন্ধা বল্সামল करना हा। व्यक्ति क नाम का उच्चारण करना इस   प्रयोग में शत्रु के पहने हुए और बिना धुले   हुए की 4~ आवश्यकता होती है। उपरोक्त मन्त्र को किसी चौराहे पर स्थित हनुमानजी के मन्दिर में मंगलवार की रात्रि में जाकर दश हजार की संख्या में जपकर सिद्ध कर सिन्दूर  লনা বান্নিবI স্রমীদক্কাল ৭ হান্তুর ক্ ক্রপভ্ ৭ং নল, लगाकर शत्रु चित्र बनाना चाहिए और प्राणन प्रतिष्ठा करके उस क वस्त्र का कलश में रखकर उसका मुख बन्द कर किसी निर्जन स्थान पर मिट्टी के नीचे दबा देना चाहिए। साधक के द्वारा ऐसा करने से उसके शत्रु की श्वासों का उच्चाटन होगा। अतः जब साधक को अपने शत्रु को स्वस्थ करना होतो कलश को मिट्टी से নিব্ধাল ले। कलश को मिट्टी के बाहर ಗೆಕ # fನ अथवा धारदार वस्तु से नहीं निकालना चाहिए नुकीले अन्यथा शत्रु को प्राणों की हानि भी हो सकती है। उच्चाटन मन्त्र 1 Hச =7 "३० वीर वीर महावीर , सात समुद्र क देवदत्त ' के ऊपर चौकी चढ़े , हियो फोड़ चोटीं चढ़े। सांस लाल लंगोट तेल नआवे पड्यो रहे, काया माहि जीव रहे सिंदूर  पूजा मांगे महावीर। अंतर कपडा पर तेल सिंदूर  हजरत वीर की चौकी रहे। ३४० नमो आदेश! आदेश!! आदेश!!! " विधि- यह प्रयोग ' मारण ्कर्म' के समान ही भयावह प्रयोग है। इसलिए इस मन्त्र को सामान्यतः किसी व्यक्ति के अहित के लिए प्रयोग नहीं करना चाहिए। उक्त मन्त्र में जहाँ देवदत्त' आया है, वहाँ उस বান্কিব নিমন্ধা বল্সামল करना हा। व्यक्ति क नाम का उच्चारण करना इस   प्रयोग में शत्रु के पहने हुए और बिना धुले   हुए की 4~ आवश्यकता होती है। उपरोक्त मन्त्र को किसी चौराहे पर स्थित हनुमानजी के मन्दिर में मंगलवार की रात्रि में जाकर दश हजार की संख्या में जपकर सिद्ध कर सिन्दूर  লনা বান্নিবI স্রমীদক্কাল ৭ হান্তুর ক্ ক্রপভ্ ৭ং নল, लगाकर शत्रु चित्र बनाना चाहिए और प्राणन प्रतिष्ठा करके उस क वस्त्र का कलश में रखकर उसका मुख बन्द कर किसी निर्जन स्थान पर मिट्टी के नीचे दबा देना चाहिए। साधक के द्वारा ऐसा करने से उसके शत्रु की श्वासों का उच्चाटन होगा। अतः जब साधक को अपने शत्रु को स्वस्थ करना होतो कलश को मिट्टी से নিব্ধাল ले। कलश को मिट्टी के बाहर ಗೆಕ # fನ अथवा धारदार वस्तु से नहीं निकालना चाहिए नुकीले अन्यथा शत्रु को प्राणों की हानि भी हो सकती है। - ShareChat