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कर रहा था ग़म ए जहां का हिसाब...! #✍️ अनसुनी शायरी #🎤 महफिल ए शायरी #एक रचना रोज ...✍︎✍︎ #✍️ साहित्य एवं शायरी #💚 लाइफ़ की शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - -ए-्जहां का हिसाब, ..कर रहा था ग़म आज तुम याद बे-हिसाब आए..!! १७ ফ্াসীহিযা -ए-्जहां का हिसाब, ..कर रहा था ग़म आज तुम याद बे-हिसाब आए..!! १७ ফ্াসীহিযা - ShareChat