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#✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - सिर्फ़ वो पसंद है जो तुझे अग़र #6=1,1 নহী मर्ज़ी तू इश्क नहीं हुकूमत चाहता है, | ( ( ~ सिर्फ़ वो पसंद है जो तुझे अग़र #6=1,1 নহী मर्ज़ी तू इश्क नहीं हुकूमत चाहता है, | ( ( ~ - ShareChat