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#📖 कविता और कोट्स✒️ #☝ मेरे विचार
📖 कविता और कोट्स✒️ - लालच और साज़िशें काग़ज़ पर होतीं तो पढ भी लेते किसी की लिखाव२, পহ মন কী স্সামী दिखती है, न समझ आती। न लालच मुस्कान औढ़े रहता है, साज़िशें खामोशी में पलती हैं, काग़ज़ तो सच बोल दे, छुपा लेता है। पर मन-्अक्स२ सच Kacha Jagdish लालच और साज़िशें काग़ज़ पर होतीं तो पढ भी लेते किसी की लिखाव२, পহ মন কী স্সামী दिखती है, न समझ आती। न लालच मुस्कान औढ़े रहता है, साज़िशें खामोशी में पलती हैं, काग़ज़ तो सच बोल दे, छुपा लेता है। पर मन-्अक्स२ सच Kacha Jagdish - ShareChat