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#जय श्री राम #भारती धनंजयराव राऊत
जय श्री राम - मन हे विकारी स्थिरता न ये रे। त्याचेनि संगे भ्रमतें भले रें। अपूर्व कार्या मन हे विटेना। रामा मज कंठवेना।| तुजविण ; 5இR मन हे विकारी स्थिरता न ये रे। त्याचेनि संगे भ्रमतें भले रें। अपूर्व कार्या मन हे विटेना। रामा मज कंठवेना।| तुजविण ; 5இR - ShareChat