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#✍मिर्झा गालिब शायरी
✍मिर्झा गालिब शायरी - BAzm "दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है आख़िर इस दर्द की दवा क्या है मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ पूछो कि मुद्दआ' क्या है काश মিড়া মলালিন bazmliterature foun dation BAzm "दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है आख़िर इस दर्द की दवा क्या है मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ पूछो कि मुद्दआ' क्या है काश মিড়া মলালিন bazmliterature foun dation - ShareChat