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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - EBK अपने अगर चुभें तो सहन कर लेना ज़नाब काँटों से बिछड़कर ग़ुलाब ग़ुलाब नहा रहता EBK अपने अगर चुभें तो सहन कर लेना ज़नाब काँटों से बिछड़कर ग़ुलाब ग़ुलाब नहा रहता - ShareChat