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#📝 अधूरे अल्फाज़
📝 अधूरे अल्फाज़ - थी कि॰ कभी ' मासूमियत' इतनी हर चीज़ पर भरोसा था, अब तजुर्बा इतना है कि सच्चाई पर भी यकीन नहीं होता ।" dilkaarin थी कि॰ कभी ' मासूमियत' इतनी हर चीज़ पर भरोसा था, अब तजुर्बा इतना है कि सच्चाई पर भी यकीन नहीं होता ।" dilkaarin - ShareChat