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##poetry #writer ##my #sayri
#poetry - साथ चले दोनो मर्द की मेहनत से उठती हैं दीवारें नारी की मेहनत से घर में आती हैं उजाले। जब साथ चले दोनों , बॅँटे हरएक काम तब बोझ नहीं लगती ज़िंदगी की हर शाम। महान बनने की ज़िद छोड़ दो ज़रा, सम्मान जब बाँटोगे , बचेगा घमंड कहाँ? दान न सही, पर दिल को रखो इंसान , शैतान वही बनता है, जो भूल जाए पहचान। भीड़ की बातों में खोना आसान है॰ देश का सोचना जिम्मेदार की पहचान है। दिल को रखो इसान  किशिस्कीै कस नचीचा मित नदरो कपने हचीभिमहन में सममान जब बॉटोगो यही छोटा सा सूत्र है देश को महान बनाने में साथ चले दोनो मर्द की मेहनत से उठती हैं दीवारें नारी की मेहनत से घर में आती हैं उजाले। जब साथ चले दोनों , बॅँटे हरएक काम तब बोझ नहीं लगती ज़िंदगी की हर शाम। महान बनने की ज़िद छोड़ दो ज़रा, सम्मान जब बाँटोगे , बचेगा घमंड कहाँ? दान न सही, पर दिल को रखो इंसान , शैतान वही बनता है, जो भूल जाए पहचान। भीड़ की बातों में खोना आसान है॰ देश का सोचना जिम्मेदार की पहचान है। दिल को रखो इसान  किशिस्कीै कस नचीचा मित नदरो कपने हचीभिमहन में सममान जब बॉटोगो यही छोटा सा सूत्र है देश को महान बनाने में - ShareChat