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#🤲अल्लाह हु अक़बर #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋 #🤲 दुआएं
🤲अल्लाह हु अक़बर - इमाम अहले सुन्नत फरमाते हैंः यह " क़ज़ा ए उमरी" की बिल्कुल जमाअत जाहिलों की ईजाद है और नाजायज़ व बातिल है। यानी वह नमाज़ जो आम लोगों में मशहूर है कि रमज़ान मुबारक के आख़िरी जुमा को क़ज़ा ए-उमरी की नियत लिए से पढ लो, तो पूरी उम्र की क़ज़ा ক্ধাদ্ধী के নসাড়ী हो जाएगी -् यह जाहिलों की बनाई बात है, जिसका हुई शरीअत ए-इस्लामिया से कोई ताल्लुक नहीं है। (फतावा रज़विया ७/४९) 1.34 am इमाम अहले सुन्नत फरमाते हैंः यह " क़ज़ा ए उमरी" की बिल्कुल जमाअत जाहिलों की ईजाद है और नाजायज़ व बातिल है। यानी वह नमाज़ जो आम लोगों में मशहूर है कि रमज़ान मुबारक के आख़िरी जुमा को क़ज़ा ए-उमरी की नियत लिए से पढ लो, तो पूरी उम्र की क़ज़ा ক্ধাদ্ধী के নসাড়ী हो जाएगी -् यह जाहिलों की बनाई बात है, जिसका हुई शरीअत ए-इस्लामिया से कोई ताल्लुक नहीं है। (फतावा रज़विया ७/४९) 1.34 am - ShareChat