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14/2/26(2) #सोचने वाली बात #points to ponder #Quran and We #*let us understand our religion #*આપણે વિચારીશું ખરા?*
सोचने वाली बात - कायनात (ब्रह्मांड) की गहराई को HS अपने वजूद (आत्मा।स्वि) को पहचानकर ताकि आख़िरकार यह साफ हो जाए कि क़ुरआन ही सच्चाई है। हदीस का अर्थ ஈி #; =!<HII: षजो अपने आप को पहचान ले, वह अपने रब को पहचान ले।" इसका यह मतलब नहीं है कि अल्लाह इंसान के अंदर है, या उसकी रूह में अल्लाह का कोई हिस्सा है नहीं! अल्लाह शरीर में नहीं आता, न किसी में समाता है। इसका सही मतलब यह हैः कायनात (ब्रह्मांड) की गहराई को HS अपने वजूद (आत्मा।स्वि) को पहचानकर ताकि आख़िरकार यह साफ हो जाए कि क़ुरआन ही सच्चाई है। हदीस का अर्थ ஈி #; =!<HII: षजो अपने आप को पहचान ले, वह अपने रब को पहचान ले।" इसका यह मतलब नहीं है कि अल्लाह इंसान के अंदर है, या उसकी रूह में अल्लाह का कोई हिस्सा है नहीं! अल्लाह शरीर में नहीं आता, न किसी में समाता है। इसका सही मतलब यह हैः - ShareChat