#दैनिक श्रीविठ्ठल दर्शन
सार्थ ज्ञानेश्वरी :- अध्याय १ ला
अर्जुनविषादयोगः
भानुचेनि तेजे धवळले ।
जैसे त्रैलोक्य दिसे उजळिले ।
तैसे व्यासमति कवळिले ।
मिरवे विश्व ॥१-३९॥
सूर्याच्या तेजाने त्रैलोक्य जसे उजळून निघते, त्या प्रमाणे महर्षी व्यासांच्या विशाल बुद्धीतून निर्माण झालेल्या या कथेमुळे सर्व जगावर ज्ञानाचा प्रकाश पसरला आणि ते शोभून दिसू लागले. ॥
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