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#जिंदगी की हकीकत #बात सोचने वाली #👉 लोगों के लिए सीख👈
जिंदगी की हकीकत - काव्यPedia मछली को चारा दिखता है काँटा नहीं चिड़िया को दाना दिखता है जाल नहीं मनुष्य को मनुष्य दिखता है मनुष्य का मन नहीं अदृश्य को देख सकने वाले के पास मात्र दो ही विकल्प शेष रहते हैं या तो वह पागल हो जाए या कवि काव्यPedia मछली को चारा दिखता है काँटा नहीं चिड़िया को दाना दिखता है जाल नहीं मनुष्य को मनुष्य दिखता है मनुष्य का मन नहीं अदृश्य को देख सकने वाले के पास मात्र दो ही विकल्प शेष रहते हैं या तो वह पागल हो जाए या कवि - ShareChat