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#❤️जीवन की सीख #aaj ki sachchai #💔दर्द भरी कहानियां
❤️जीवन की सीख - बिक रहा है पानी, पवन बिक न जाए बिक गयी है धरती गगन बिक न जाए चाँद पर भी बिकने लगी है जमीं डर है की सूरज की तपन बिक न जाए . नीति, हर जगह बिकने लगी है स्वार्थ डर है की कहीं धर्म बिक न जाए < को दहैज ख़रीदा गया है अब ತ೯೯ कही उसी के हाथों दुल्हन बिकॅन जाए ೯೫ ল ফট সন ঐ ননা  ೯ ೫೯ ಹ कही इन्ही के वतन बिक न जाए  মং সাস নিক্ধন লযী সন নী মাম डर है की कहीं संसद भवन बिक न जाए आदमी मरा तो भी आंखें खुली 55 ೯ कहीं कफ़न बिँक नॅ जाए। ভনো ; मुर्दा . बिक रहा है पानी, पवन बिक न जाए बिक गयी है धरती गगन बिक न जाए चाँद पर भी बिकने लगी है जमीं डर है की सूरज की तपन बिक न जाए . नीति, हर जगह बिकने लगी है स्वार्थ डर है की कहीं धर्म बिक न जाए < को दहैज ख़रीदा गया है अब ತ೯೯ कही उसी के हाथों दुल्हन बिकॅन जाए ೯೫ ল ফট সন ঐ ননা  ೯ ೫೯ ಹ कही इन्ही के वतन बिक न जाए  মং সাস নিক্ধন লযী সন নী মাম डर है की कहीं संसद भवन बिक न जाए आदमी मरा तो भी आंखें खुली 55 ೯ कहीं कफ़न बिँक नॅ जाए। ভনো ; मुर्दा . - ShareChat