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#❤️जीवन की सीख #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार
❤️जीवन की सीख - 118 4811 आत्मवर्ग परित्यज्य पखर्ग समाश्रयेत। स्वयमेव लयं याति यथा राजान्यधर्मतः | "जो व्यक्ति अपने लोगों को छोड़कर uui का साथ देता है॰चह स्वयं ही नष्ट हो जाता जैसे कोई राजा अधर्म कर्ने से स्वयं अपने राज्य का विनाश करलेता है।" आचार्य चाणक्य 0:5457 118 4811 आत्मवर्ग परित्यज्य पखर्ग समाश्रयेत। स्वयमेव लयं याति यथा राजान्यधर्मतः | "जो व्यक्ति अपने लोगों को छोड़कर uui का साथ देता है॰चह स्वयं ही नष्ट हो जाता जैसे कोई राजा अधर्म कर्ने से स्वयं अपने राज्य का विनाश करलेता है।" आचार्य चाणक्य 0:5457 - ShareChat