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#🖋ग़ालिब की शायरी #📒 मेरी डायरी #📖 कविता और कोट्स✒️ #✍️ साहित्य एवं शायरी #✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
🖋ग़ालिब की शायरी - 700 ঔকলা जिंदगी में इंसान उस वक्त टूट जाता है। जब सबकुछ पास रहकर भी वो अकेला रह जाता है। 700 ঔকলা जिंदगी में इंसान उस वक्त टूट जाता है। जब सबकुछ पास रहकर भी वो अकेला रह जाता है। - ShareChat