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संत रैदास जी तथागत बुद्ध को अपना गुरु मानते थे । तथागत बुद्ध के चारित्रकार है संत रैदास। संत रैदास जी ने अपने दोहे में कहा है कि "अजामिल ,गज, गणिका ,तारी काटी कुंजीर पाश ऐसे गुरमते मुक्त किये तू क्यों न तरे रैदास!" :- अजामिल यानि अंगुलिमाल,हे तथागत तुमने अंगुलिमाल जैसे हिंस्र आदमी को इंसान बनाया हे तथागत तुमने गज यानि पागल हाथी को शांत किया उसके भी मार्गदाता बन गए ।है तथागत गणिका यानि आम्रपाली के आप मार्गदाता बन कर उसका घमंड को चूर चूर करके उसे भिक्खु संघ में लिया।तुम इन सभी के मार्गदाता हो गए ,तो तुम्हारे इस रैदास के तुम गुरु नहीं हो ? संत रैदास बुद्ध को अपना गुरु घोषित किये थे ।संत रैदास और संत कबीर अपने दोहे में तथागत बुद्ध को अपना गुरु घोषित किए थे ।ब्राम्हण इन बातों को छुपाते है । ताकि हमारी प्रेरणा सही सामने न आये। ब्राम्हण इसलिए झूठा बताते है कि यह साधु ,संत भक्ति कर रहे थे ।अगर यह भक्ति का आंदोलन था तो उनकी हत्याएं क्यों की गयी? हमारा यह सिद्धान्त है कि संतो का आंदोलन भक्ति का आंदोलन नहीं था बल्कि मानव मुक्ति का आंदोलन था !!!! #બુદ્ધ પુર્ણિમા #🙏ગૌતમ બુદ્ધ 🙏 #🔄કર્મનું જ્ઞાન🙏 #Chalo Buddha Ki Or #🙏ગૌતમ બુદ્ધના સિદ્ધાંત📙
બુદ્ધ પુર્ણિમા - ShareChat